NASA के टेलीस्कोप ने कैद किया तारे के सुपरनोवा होने का दुर्लभ नजारा Newshindi247

NASA के टेलीस्कोप ने कैद किया तारे के सुपरनोवा होने का दुर्लभ नजारा Letest Hindi News
LiveScience पर प्रकाशित रिपोर्ट में NASA के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है, “बड़े तारों में से कुछ ही सुपरनोवा होने से पहले ऐसे फेज में पहुंचते हैं। यह एस्ट्रोनॉमर्स के लिए अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने में काफी महत्वपूर्ण है।” बहुत बड़े आकार वाला यह तारा 15,000 लाइट ईयर्स दूर मौजूद है। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने पिछले वर्ष जून में पहली बार इसकी इमेज ली थी। तारे के सुपरनोवा होने के दौरान बादल इसे झेल सकता है और ब्रह्मांड में धूल को बढ़ाता है। नासा के अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मांड के कार्य करने में धूल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नए बनने वाले तारों को ढाल देती है।
ब्रह्मांड में एस्ट्रोनॉमर्स के अनुमान से अधिक धूल है। इस प्रकार की इमेज से इस धूल के रहस्यमयी स्रोत के बारे में जानकारी मिल सकती है। जेम्स वेब टेलीस्कोप से पहले एस्ट्रोनॉमर्स के पास WR 124 जैसे एनवायरमेंट्स में धूल के बनने को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं थी। वास्तविक डेटा मिलने के बाद इस बारे में रिसर्च को बढ़ाया जा सकता है।
हाल ही में नासा के Curiosity यान ने मंगल ग्रह पर सूर्य की किरणों की स्पष्ट इमेज ली थी। ये इमेज ट्विलाइट क्लाउड सर्वे की सीरीज के तहत ली गई थी। यह सर्वे जनवरी में शुरू हुआ था और मार्च के मध्य तक चलेगा। सूर्य की किरणों को क्रेपस्क्युलर रे भी कहा जाता है। सूर्य की रोशनी के बादलों के बीच की जगह से चमकने पर ये दिखती हैं। यह पहली बार है कि जब सूर्य की किरणें मंगल ग्रह पर स्पष्ट दिखी हैं। धरती पर ये किरणें धुंधली स्थितियों में सबसे अधिक दिखती हैं, जब वातावरण में धुएं, धूल और अन्य कणों को रोशनी बिखरा देती है। ये किरणें बादल के पार एक बिंदु पर मिलती लगती हैं लेकिन वास्तव में ये एक दूसरे के समानांतर चलती हैं।
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Post Credit :- hindi.gadgets360.com
Date :- 2023-03-19 09:24:47