The Hindu हिंदी में: भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के रिश्तों में तनाव के पीछे क्या कारण है, पढ़‍िए 3 अक्‍टूबर का आर्टिकल

The Hindu हिंदी में: भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के रिश्तों में तनाव के पीछे क्या कारण है, पढ़‍िए 3 अक्‍टूबर का आर्टिकल
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अमृतसर में जन्मे गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका के न्‍यूयॉर्क में अटॉर्नी यानी वकील हैं। हाल ही में पन्‍नू की हत्‍या की साजिश की खबर के चलते भार और यूएस के बीच रिश्‍तों पर संकट गहराया है। पिछले कुछ महीनों में खालिस्तान का समर्थन कर रहे एक कनाडा के नागरिक की हत्या के बाद भारत और कनाडा के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। जहां इस मामले ने कनाडा और भारत के रिश्तों में तनाव को बढ़ा दिया है, वहीं अब यूनाइटेड स्टेट्स ने गुरपतवंत की हत्या की साजिश रचने का आरोप भारत के अधिकारियों पर लगा दिया है।

भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के रिश्तों में गहराते संकट के केंद्र में पन्नू की हत्या की साजिश के आरोप हैं। गुरपतवंत सिंह पन्नू पहली बार खबरों में तब आए, जब उन्होंने कनाडा में आम आदमी पार्टी के फंड इकठ्ठा करने के प्रयासों का विरोध किया। 2016 में पन्नू ने एक अभियान शुरू किया जिसमें मीडिया चैनलों के जरिए पंजाब के आम आदमी पार्टी के नेताओं पर कनाडा में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से फंड इकट्ठा करने के आरोप लगाए गए थे।

उन्होंने फंड इकठ्ठा करने के इस कैंपेन को कनाडा के कानूनों के खिलाफ बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों से कनाडा की सरकार ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कनाडा आने से रोक दिया। अटॉर्नी ने अपनी बात रखने के लिए भारतीय मीडिया को ऑटोमैटिक फोन कॉल, सोशल मीडिया के मशहूर लोग और स्पैम ईमेल का सहारा लिया।

पन्नू ने 2007 में 1984 के सिख–विरोधी दंगों में मारे गए लोगों की याद में ’सिख्स फॉर जस्टिस’ की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा भड़क गई थी। अमृतसर में जन्मे अटॉर्नी पन्नू 1984 के दंगे और संत भिंडरांवाले के नेतृत्व में चले आंदोलन में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने की इच्छा रखते हैं। टाइम मैगजीन में हाल के उनके इंटरव्यू में उन्होंने इसे ’नागरिक असहयोग’ का नाम दिया।

पन्नू 1990 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स पहुंचे और एक अंतर्राष्ट्रीय बैंक के लिए काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अटॉर्नी की ट्रेनिंग ली। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जिस तरह 1984 के सिख–विरोधी दंगों से जुड़े केस चल रहे हैं, उससे वे संतुष्ट नहीं हैं। इस वजह से उन्होंने दोषियों की जवाबदेही तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सहारा लेने का मन बनाया।

खालिस्तान समर्थन के चेहरे
पिछले एक दशक में वे खालिस्तान समर्थन के महत्वपूर्ण चहरे के रूप में उभरे हैं। इस साल के शुरुआत में पुलिस द्वारा अमृतपाल सिंह की तलाश चल रही थी और दीप सिद्धू ने 26 जनवरी, 2021 को लाल किले पर खालसा झंडा फहराया था। जहां इन लोगों ने भारत में रहते हुए परेशानियां खड़ी की, वहीं पन्नू ने पिछले कुछ सालों में भारत की कोई यात्रा नहीं की है। इसी साल भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी( NIA) ने पन्नू के चंडीगढ़ के घर के साथ उनके परिवार की अमृतसर की एक संपत्ति को जब्त कर लिया था।

पन्नू को वीडियो संदेश जारी करना अच्छा लगता है। उनके ऐसे ही एक संदेश ने 4 नवंबर को हेडलाइंस में जगह बनाई जब उन्होंने 19 नवंबर के बाद एयर इंडिया के जहाजों में न चढ़ने की चेतावनी दी। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिन इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बंद रहेगा। इस चर्चित वीडियो के सामने आने के बाद NIA ने UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत उनके ऊपर केस दर्ज कर दिया है।

10 जुलाई, 2019 को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने ‘सिख फॉर जस्टिस’ को गैर कानूनी घोषित कर दिया। इसके बाद 1 जुलाई, 2020 को पन्नू को एक आतंकवादी के रूप में घोषित कर दिया गया।

पन्नू को अक्सर प्राइवेट बॉडीगार्ड के साथ देखा गया है। 10 जून को कनाडा के सुर्रे में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पन्नू की अहमियत बढ़ गई है। इस घटना ने भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्ते में तनाव की शुरुआत कर दी है। इस विवाद का पूरी तरह सुलझना अभी बाकी है। कनाडा भारत से इस मुद्दे पर एक गंभीर जांच चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने इसके पीछे ‘भारतीय एजेंटों’ का हाथ होने का आरोप लगाया है।

निज्जर की हत्या के बाद, कनाडा, यूनाइटेड स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड में रह रहे भारतीय राजदूतों के खिलाफ पन्नू ने कई अभियान चलाए हैं। इन ऑनलाइन अभियानों का असर जमीन पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने बढ़ा दिया है। ब्रिसबेन, लंदन, सैन फ्रांसिस्को, न्यू यॉर्क में रह रहे कई भारतीय समुदायों के बीच झगड़े की खबरें भी सामने आई हैं।

यूनाइटेड स्टेट्स ने खालिस्तान समर्थक पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप भारतीय अधिकारियों पर लगा कर पन्नू को वह अहमियत दे दी है, जिसे हासिल करने का प्रयास वे 2007 से कर रहे थे। जहां एक तरफ यूनाइटेड स्टेट्स के अधिकारी इस साजिश की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं पन्नू के एयर इंडिया को दी गई धमकी से जुड़े कई मुश्किल सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है।

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Post Credit : – www.bhaskar.com

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