5वीं पास महिलाओं के लिए मौका, इस मिशन से जुड़कर बन सकते हैं पशु सखी, हर महीने मिलेंगे इतने रुपए

5वीं पास महिलाओं के लिए मौका, इस मिशन से जुड़कर बन सकते हैं पशु सखी, हर महीने मिलेंगे इतने रुपए

मोहित शर्मा/ करौली.

ग्रामीण अंचल में रहने वाली और पशुपालन से अपनी आजीविका चलाने वाली पांचवी पास ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की राह में राजीवका के सहारे से पशु सखी बनकर उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीक सीख रही हैं. पशु सखी की चार दिन की ट्रेनिंग से पांचवी पास महिलाएं 4 दिन में पशुओं की सार- सभार नए-नए तरीके सीखकर अब छोटी-मोटी बीमारियों का तो स्वयं ही इलाज कर सकेंगी. बल्कि पशु सखी बनने वाली यह ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं ग्रामीण अंचल में भी लोगों को उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीक सिखायेंगी. जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्र की इन महिलाओं को राजीवका के द्वारा ₹1500 का मासिक भत्ता भी उपलब्ध कराया जाएगा.

काफी कुछ सीखने को मिला

पशु सखी की ट्रेनिंग लेने आई पांचवी पास महिला शर्मिला गुर्जर ने बताया कि इस ट्रेनिंग में हमें बहुत कुछ सीखने को मिला. जिसमें हमें पशुओं का आवास कैसा होना चाहिए, सामान्य बीमारी होने पर पशुओं को कौन-कौन सी दवाई दी जाती हैं, पशुओं में दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें कौन-कौन से खनिज लवण खिलौने चाहिए ऐसी कई जानकारी हमें यहां सीखने को मिली है. शर्मिला ने बताया कि पशु सखी की ट्रेनिंग से हम अपनी आर्थिक दशा भी हर महीने मिलने वाले भत्ते से भी सुधार सकेंगे.

एक गांव से एक महिला को बनाया जाता है पशु सखी :

राजीवका के स्टेट रिसोर्स पर्सन हेमराज सैनी ने बताया कि पशु सखी में हर गांव से एक महिला को लिया जाता है और फिर उसका सलेक्शन होने के बाद स्टेट लेवल पर उसकी ट्रेनिंग कराई जाती है. पशु सखी की चार दिन की ट्रेनिंग में नॉर्मल तरीके से आवास प्रबंधन, पशुओं की स्वच्छता, नस्ल सुधार और कौन-कौन सी अच्छी नस्ल पालकर यह अपना उत्पादन बढ़ा सकती हैं. साथ ही अपने आसपास में बिगड़ी नस्लों में सुधार कैसे कर सकते हैं. इसके अलावा पशु सखी को उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित आहार कौन-कौन सा देना चाहिए.

शिविर के बाद होती है लिखित परीक्षा

जानकारी के अनुसार पशु सखी की चार दिन के शिविर के बाद इनका एक मौखिक और लिखित एग्जाम होता है. एग्जाम पास आउट करने के बाद इन महिलाओं को ब्लॉक लेवल पर जॉइनिंग दी जाती है. फिर इनको अपने ही गांव में काम करने का मौका मिलता है. 4 दिन की प्रशिक्षण में जो इन महिलाओं को सिखाया जाता है उन्हें तकनीकों को यह महिलाएं राजीव का समूह से जुड़े हुए लोगों को सिखाती है और महीने के अंत में इन महिलाओं को ₹1500 का मासिक भत्ता भी दिया जाता है.

पशु सखी बनने के लिए यह चाहिए योग्यता

स्टेट रिसोर्स पर्सन हेमराज सैनी ने बताया कि पशु सखी बनने के लिए सबसे पहले महिला का 1 साल पहले से राजीव का समूह से जुड़ना अनिवार्य है. साथ ही कम से कम उसकी शैक्षणिक योग्यता पांचवी पास होने के साथ उन्हें लिखना व पढ़ना आना चाहिए. नेतृत्व करने के गुण भी पशु सखी बनने के लिए महिला में होनी चाहिए. ताकि वह ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं से काम करवा सके.

उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश भर में 6000 ग्रामीण महिलाओं को पशु सखी बनाने का लक्ष्य रखा गया है. जिसमें करौली में 350 महिलाओं को पशु सखी बनाया जाएगा. जिले में पशु सखी के पहले बैच में अब तक 41 महिला व दूसरे बैच में 30 महिलाओं की ट्रेनिंग कराई जा चुकी है.

hindi.news18.com

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